Thursday, August 23, 2018

दूसरा

घृणा या प्रेम
होते हैं दोनों
स्वयं ही से

या मैं दूसरा
या दूसरे मैं

Monday, August 13, 2018

त्रासदी

कुछ दुर्भाग्य, है राजा आदतन फरेबी
और कुछ त्रासदी, हैं हम फरेब के आदी

Sunday, August 12, 2018

फिर भी

वृक्षों का भू पर
प्राणी का वन पर
मछली का जल पर
पंछी का नभ पर
दावा नहीं

फिर भी क्या
खुश नहीं वो

मानव कहता
मैं स्वामी
भू का
वन का
जल का
नभ का

फिर भी क्यों
खुश नहीं वो

Friday, August 10, 2018

आदमी

है पत्थर में बसने लगा देव, जब से
आदमी के दिल का किराया बढ़ा है

सादगी

रौब कुछ ऐसा है सादगी का
द्वेष करता है हर रुतबा इससे

Thursday, July 19, 2018

आखिर

#१

वो आदमी
जिसकी जूठन पर
डकार ले ले
शहर सारा

आखिर
मिटती नहीं क्यों
भूख उसकी

#२
वो शहर
जिसकी फूँक में
खो जाता
सूरज सारा

आखिर
थकती नहीं क्यों
साँस उसकी

Wednesday, July 18, 2018

फासले

फासले अब इतने हो चले हैं खुद से
अपनी ही आवाज़ सुनाई नहीं देती

वो आँखें जो घूर रही हैं आईने से
क्यों अब सवाल भी नहीं करतीं

दस्तक

दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का