Sunday, October 4, 2020

सबूत अपर्याप्त हैं

वह विवादित ढांचा

जिसे संविधान कहते हैं

गिराया जा रहा है

रोज़ ब रोज़

पर किसी साजिश के

सबूत अपर्याप्त हैं


वह असहाय अस्मिता

जिसे न्याय कहते हैं

नोची, जलाई जा रही है

रोज़ ब रोज़

पर किसी साजिश के

सबूत अपर्याप्त हैं


अदालत का फैसला है

कोई जिम्मेदार नहीं

बाइज्ज़त बरी हों

आरोपी सारे


और आरोपियों से

निवेदन है उस

ढांचे के बदले

भव्य मंदिर बनाएं


न्याय हो न हो

न्याय की भव्य

मूर्ति हो

पूजा हो

रोज़ ब रोज़

Friday, October 2, 2020

बापू लौट जा

यहाँ हर हृदय में

फासला समाया है

हमने अपना कलंक

मुकुट पर सजाया है 

बापू लौट जा

ये देस पराया है


सत्य की कब्र पर

रक्त जमाया है 

हमने राम मन्त्र से

नाथू पनपाया है

बापू लौट जा

ये देस पराया है

Wednesday, September 30, 2020

रामभूमि

 हे राम

धर्म की रक्षा की

तुम्हारी भूमि ने

न्याय को मार कर

हे राम


बहुमत

 कोई पुलिस

कोई अदालत

कोई नेता

नहीं मार सकता

न्याय को


न्याय की हत्या

करते हैं

हम और आप

अपने मत से

बहुमत से

हाथरस की बिटिया

क्यों बैठे हो तुम

चुपचाप 


क्या तुम्हारी 

जिव्हा भी 

काट ली है

पूर्वाग्रहों ने

चुपचाप


क्या तुम्हारी

आत्मा भी

जला दी गई है

रात के अँधेरे में

चुपचाप

Tuesday, September 15, 2020

अस्थाई मजदूर

अस्तित्व

हुआ करता था

भारत में

मेरा भी


अस्थाई सही

हाशिये पर सही

सरकार मुझे

गिनती तो थी


पर अब 

मैं नहीं रहा

मुझे मार दिया

दो बार


पहले

हाईवे पर

चलते हुए


और फिर

सरकारी

आंकड़ों में

Friday, September 11, 2020

देशप्रेम

धंधा तो 

धंधा है 

थोड़ा चेक

बाकी कैश में


मित्रों को

प्रेम बहुत है

लेकिन अपने

देश से

दस्तक

दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का