क्यों बैठे हो तुम
चुपचाप
क्या तुम्हारी
जिव्हा भी
काट ली है
पूर्वाग्रहों ने
चुपचाप
क्या तुम्हारी
आत्मा भी
जला दी गई है
रात के अँधेरे में
चुपचाप
क्यों बैठे हो तुम
चुपचाप
क्या तुम्हारी
जिव्हा भी
काट ली है
पूर्वाग्रहों ने
चुपचाप
क्या तुम्हारी
आत्मा भी
जला दी गई है
रात के अँधेरे में
चुपचाप
अस्तित्व
हुआ करता था
भारत में
मेरा भी
अस्थाई सही
हाशिये पर सही
सरकार मुझे
गिनती तो थी
पर अब
मैं नहीं रहा
मुझे मार दिया
दो बार
पहले
हाईवे पर
चलते हुए
और फिर
सरकारी
आंकड़ों में
दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का