Wednesday, September 9, 2020
Sunday, September 6, 2020
Friday, August 28, 2020
जस्टिस फॉर भारत
लोग सदमे में हैं
कहते हैं उसका
उज्जवल भविष्य था
फिर कैसे
वह मर गया
कुछ कहते हैं
आत्महत्या
कुछ कहते हैं
उसे मारा उन्होंने
जो उससे प्यार
का दावा करते हैं
जाँच होनी चाहिए
कैसे मरा
भारत
जस्टिस फॉर भारत
मारीच
राजा और मारीच
घने मित्र हैं
जब जब राजा
लछ्मण रेखा
लांघता है,
सीता हर लेता है
तब तब मारीच
स्वर्ण मृग बन
जनता को
दूर ले जाता है
राजा और मारीच
घने मित्र हैं
गिद्ध
रोज वही लाश
नोच कर खा रहे
अर्नब, नाविका, सुधीर
तुम ठीक तो हो?
तुम्हें नींद तो
अच्छी आती ही होगी?
तुम अपने बच्चों को
सीख अच्छी देते ही होगे?
रोज उसी लाश
का कत्ल होते
देख रहे दर्शकों
तुम ठीक तो हो?
तुम जानते तो हो
वह लाश तुम्हारे
अपने बच्चों के
भविष्य की है?
Saturday, August 15, 2020
Sunday, May 10, 2020
क्षोभ
रेलगाड़ी
जो तुम्हें काट गई
वही जनतंत्र है
तुम
जो इस पटरी पर
चल रहे हो
तिहत्तर वर्षों से
अस्थायी प्रवासी हो
हम
जो क्षोभित हैं
तुम्हारे कटने पर
इस गाड़ी के
स्थायी प्रवासी हैं
हमें
तुम्हारे और
तुम्हारी पीढ़ियों के
स्थायी अस्थायित्व पर
क्षोभ नहीं होता
अब तुम
दूर रहो
इस पटरी से
और इस गाडी से
तुम्हारे कट जाने पर
बहुत क्षोभ होता है
जो तुम्हें काट गई
वही जनतंत्र है
तुम
जो इस पटरी पर
चल रहे हो
तिहत्तर वर्षों से
अस्थायी प्रवासी हो
हम
जो क्षोभित हैं
तुम्हारे कटने पर
इस गाड़ी के
स्थायी प्रवासी हैं
हमें
तुम्हारे और
तुम्हारी पीढ़ियों के
स्थायी अस्थायित्व पर
क्षोभ नहीं होता
अब तुम
दूर रहो
इस पटरी से
और इस गाडी से
तुम्हारे कट जाने पर
बहुत क्षोभ होता है
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दस्तक
दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का
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बनने से संभव नहीं है होना होना तो संभव है होने से ही होने की राह नहीं चाह नहीं होने का यत्न नहीं प्रयत्न नहीं होना तो हो रहना...
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