राजा और मारीच
घने मित्र हैं
जब जब राजा
लछ्मण रेखा
लांघता है,
सीता हर लेता है
तब तब मारीच
स्वर्ण मृग बन
जनता को
दूर ले जाता है
राजा और मारीच
घने मित्र हैं
राजा और मारीच
घने मित्र हैं
जब जब राजा
लछ्मण रेखा
लांघता है,
सीता हर लेता है
तब तब मारीच
स्वर्ण मृग बन
जनता को
दूर ले जाता है
राजा और मारीच
घने मित्र हैं
रोज वही लाश
नोच कर खा रहे
अर्नब, नाविका, सुधीर
तुम ठीक तो हो?
तुम्हें नींद तो
अच्छी आती ही होगी?
तुम अपने बच्चों को
सीख अच्छी देते ही होगे?
रोज उसी लाश
का कत्ल होते
देख रहे दर्शकों
तुम ठीक तो हो?
तुम जानते तो हो
वह लाश तुम्हारे
अपने बच्चों के
भविष्य की है?
दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का