Monday, March 29, 2021

चालाक

आज 
कट रही टहनी पर
तुम्हारा घोंसला नहीं है
इसलिए शांत हो
तुम चालाक हो

जिसका घोंसला है
वह भी तो चालाक था
कल तक

Tuesday, March 23, 2021

सूरज

सूरज
मुझसे पहले भी
चमक रहा था

सूरज
मेरे बाद भी
चमकेगा

इस दरम्यान
रात नही होने देना
यह मेरा काम है

Tuesday, March 2, 2021

एक और दुनिया

ऐ ईश्वर
तू है सचमुच तो
बनाई होगी तूने
एक और दुनिया

सत्ता होती होगी
निस्वार्थ लुटतेे हुए 
पेड़ों की वहाँ

जहाँ आदमियों से
बिलबिलाते होंगे
जमाखोर लोभी
आदमी

Sunday, February 14, 2021

डर

तेरे सच की चिंगारी से
उसका महल जो पिघल रहा है

तेरे सवालों के जुगनुओं से
उसका अँधेरा जो बुझ रहा है

वो तुझे डराएगा
वो डर जो रहा है 

Friday, February 5, 2021

मजबूरी

मत पूछो 
वो क्यों चुप थे
जब बोलना था
मजबूरी होती है
मशहूरी की

मत पूछो
क्यों ट्वीट पड़े
जब चुप रहना था
मजबूरी होती है
मशहूरी की

तुम खिलाड़ी नहीं
तुम कलाकार नहीं
तुम नहीं समझोगे
मजबूरी होती है
मशहूरी की

Thursday, February 4, 2021

साहब

खेतों में कील बोआते हो
खौफ की फसल उगाते हो
फिर सीने का नाप गिनाते हो
साहब तुम खूब रिझाते हो

एक मजाक से मर जाते हो
एक कटाक्ष से कट जाते हो
फिर मन की बात बताते हो
साहब तुम खूब रिझाते हो

चीन को झूला झुलाते हो
नेहरू को गरियाते हो
फिर हैशटैग जंग चलाते हो
साहब तुम खूब रिझाते हो

शिक्षा बजट घटाते हो
पेट्रोल गगन छुआते हो
फिर अच्छे दिन दिखलाते हो
साहब तुम खूब रिझाते हो

Wednesday, February 3, 2021

सवाल

रल
मादक
मोहक
होता है
पर जवाब
मिथ्या भ्रामक
होता है

कठिन
कठोर
कुरूप
होता है
पर सवाल
पथ प्रदर्शक
होता है

सवाल
की ऊंगली ही
पहुँचाती है
सत्य तक


दस्तक

दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का