Thursday, September 10, 2020

पोस्टमैन

एक ही 

है काम

हम दोनों का


मैं संदेश 

पहुँचाता हूँ

और तुम भी


लेकिन मैं

संदेश में

मिलावट 

नहीं करता


मेरे

लिफाफे में

अफीम

नहीं होती


अरे मैं

पोस्टमैन है


पोस्टमैन है

मैं

मीडिया

कौन कहता है

मीडिया बिक गया है

मिट गया है


मैंने देखा है

उसे बेखौफ

सवाल पूछते हुए

एक डाकिये से

Wednesday, September 9, 2020

सवाल न कर

वो धर्म बचा रहा है

तू स्कूल अस्पताल न कर

राजा से सवाल न कर


वो इतिहास सँवार रहा है

तू नौकरी पर बवाल न कर

राजा से सवाल न कर


वो बुलेट ट्रेन दौड़ा रहा है

तू "पॉटहोल" का खयाल न कर

राजा से सवाल न कर

होड़

अजब दौड़ है

गिरने की होड़ है

मूर्खता का ईनाम 

वाइ-प्लस

धूर्तता का पुरस्कार

ज़ेड-प्लस

इंद्रधनुष

चाह है कि 
खोज लूँ
रंग 
अपने सभी 

फिर
बिखर कर
हो जाऊँ
आसमाँ 

Sunday, September 6, 2020

कुंठा

तबाही भाने लगी है

सिंहासन पर बिठाया है

अपनी कुंठा को जब से 

Friday, August 28, 2020

जस्टिस फॉर भारत

 लोग सदमे में हैं

कहते हैं उसका

उज्जवल भविष्य था

फिर कैसे

वह मर गया


कुछ कहते हैं

आत्महत्या


कुछ कहते हैं

उसे मारा उन्होंने

जो उससे प्यार

का दावा करते हैं


जाँच होनी चाहिए

कैसे मरा

भारत

जस्टिस फॉर भारत

दस्तक

दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का