Saturday, October 17, 2015

उत्तर प्रदेश


बद-किस्मत प्रदेश है कितना
विचलित धर्म बवाल पर
मौन निस्तब्ध सारे क्यों ज्ञाता
रोजी भूख सवाल पर

 
मानव मानव से डरता लड़ता
नेता के निर्मित जाल पर
नहीं खौलता खून हमारा
बद से बदतर हाल पर

Friday, October 9, 2015

चार कविताएँ


चार कविताएँ
एक शब्द की


जीवन
बोध
मृत्यु
मैं


एक कविता
चार शब्द की

कविता

शब्द
से सार
से भाव
से सत्य
कुरेदती
कविता

खेल

खोज ले अनंत
अंत के पहले
है वही खिलाड़ी
जीवन खेल का

Sunday, October 4, 2015

आदमी

सच है अलग है आदमी
देखा है कभी जानवर को
अपनों के शिकार पर?

Friday, October 2, 2015

छलावा

चाहा बिखेरें रौशनी इस शहर में
खबर क्या उन्हें है अँधेरे की लत

शीशा बदल कर जो इतरा रहे हैं
नवाक़िफ़ न ऐसे बदलती है सूरत

छुपाये हैं धब्बे चमक से पराई
शातिर है चंदा छलावे की मूरत

(11-Oct-14)

डू यू लव मी

वो इकलौती है
हँसती जो
मेरे अच्छे बुरे
हर लतीफ़े पर

वो इकलौती है
इंतजार करती
मेरे फोन का
हर उड़ान के
पहले और बाद

वो इकलौती है
डांटती माँ सी
और हक जताती
जैसे बेटी हो

वो इकलौती है
कहती जो "नो"
पूँछता मैं जब
"डू यू लव मी"

दस्तक

दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का