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दस्तक
दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का
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दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का
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जो लिखा सो सही सच वो पूरा पर नहीं दे रहा इस पल जो दस्तक उसकी तो पुस्तक नहीं तू ठहर हो शांत साक्षी तुझ सिवा तो कुछ नहीं
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फरेब बहाने झूठ मिट रहे हैं धीरे-धीरे आकृतियाँ कहानियाँ शब्द घुल रहे हैं धीरे-धीरे अहम् वहम् फहम से कुछ दूर मिल रहे हैं हम धीरे...
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