Saturday, November 9, 2019

राम लला


#१

क्या हुआ कि यहाँ
खून बहा था
आदमी मरा था

दाग पोंछ दिये
गंगा जल से हमने

राम लला
तुम लौट आओ
निसंकोच

#२

क्या हुआ कि यहाँ
आस्था गिरी थी
मर्यादा मरी थी

तुमसे दूर भेज दिया
खुदा को हमने

राम लला
तुम रहो यहाँ
बेखौफ़

Wednesday, October 2, 2019

बापू

क्या बात है तेरी हस्ती में बापू
तेरे कातिल तुझे मार नहीं पाते

Thursday, August 15, 2019

स्वतंत्र

स्व से स्वतंत्र है
स्व से ही स्वाधीन
स्व जगा तो जग जगे
स्व सुसुप्त जग हीन

Monday, August 12, 2019

फिक्र

मैं परेशान
समेटता रहा उसे

वो बेपरवाह
बिखरती रही

जिंदगी मेरा सब्र
सतत परखती रही

अब
मैं बेफिक्र
बहने लगा हूँ
मौज सा

और
वो बेसब्र
सिमटने लगी है
मुझ ही में

Thursday, August 8, 2019

अंधेरा

चांद ने कहा
सूरज है
अंधेरे का दोषी

हमने चांद को
सूरज बना दिया

अब ठंड है
धूप नहीं होती

हर पूनम
पूजते हैं
चांद को

हर अमावस्
कोसते हैं
सूरज को

Thursday, July 25, 2019

खेल

क्षण
विशाल वृक्ष सा
अथाह ब्रह्म में
फैलाए अनगिनत
टहनियां

समय
अनवरत टहनियों सा
बिखेरता स्मृतियों के
तिनके

तिनके समेट
तनिक तनिक
तन-घोसला बनाती
रूह

खेल
खेल रहे
निरंतर
रूह
और
ब्रह्म

मुश्किल

हम पहले मिलते थे
तो मैं डर जाता था

फिर मुलाकातें बढ़ीं
और दोस्ती हो गई
मै तुझसे, तू मुझसे
मजाक करने लगी

ऐ मुश्किल
अब मैं तेरा महबूब हूँ
तेरे बिना नहीं कटता
एक पल भी
मुश्किल से

दस्तक

दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का