हर वर्ष
क्यों हो रहा
रावण दहन
राम आगमन
एक बार ही
क्यों न हो
असुर तमाम
बसें राम
क्यों न हो
एक बार दशहरा
क्यों न हो
हर रोज़ दिवाली
Thursday, October 19, 2017
Friday, October 13, 2017
Sunday, October 1, 2017
महाकबर
मल नालों से
सटे सँकरे
टिन के डिब्बों
में रहती
महानगर की
महाकबर की
लाशें
सटे सँकरे
टिन के डिब्बों
में रहती
महानगर की
महाकबर की
लाशें
ट्रफिक में
एम्बुलेंस सी
अटकी हैं
इनकी सांसे
दम लेंगी
दम टूटने पर
गिर कर
ट्रेन से
डूब कर
मैनहोल में
लाशें
एम्बुलेंस सी
अटकी हैं
इनकी सांसे
दम लेंगी
दम टूटने पर
गिर कर
ट्रेन से
डूब कर
मैनहोल में
लाशें
बस-ट्रेन में
ईसा सी
लटकी हुई
दौड़ती जा रही
भगदड़ में जीती
भगदड़ में मरती
लाशें
ईसा सी
लटकी हुई
दौड़ती जा रही
भगदड़ में जीती
भगदड़ में मरती
लाशें
Saturday, September 23, 2017
दूसरा
नहीं कर सकता
प्यार खुद से मैं
कर घृणा उससे
उत्थान नहीं मेरा
उसके पतन से
वह "दूसरा"
साया है मेरा ही
प्यार खुद से मैं
कर घृणा उससे
उत्थान नहीं मेरा
उसके पतन से
वह "दूसरा"
साया है मेरा ही
Tuesday, August 29, 2017
क्षितिज
क्षितिज के इस पार
आरंभ
आकार
स्थान
समय
शोर
ऊर्जा
अंत
क्षितिज के उस पार
अंत
निराकार
शून्य
शाश्वत
मौन
शीत
नवारंभ
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दस्तक
दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का
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बनने से संभव नहीं है होना होना तो संभव है होने से ही होने की राह नहीं चाह नहीं होने का यत्न नहीं प्रयत्न नहीं होना तो हो रहना...
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कुश, कुश पर पिंड पिंड पर तिल, पुष्प, जल, भोग अर्पित कर सविधि श्राद्ध किया "मैं" का मैंने हे प्रभु "मैं" की मुक्ति हो ...
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इस साल कुछ पाना नहीं है खोज लेना है बस गुमशुदा खुद को। इस साल कहीं जाना नहीं है लौट आना है बस यहाँ, अभी। इस साल कुछ बनना नहीं है ...
