Thursday, October 19, 2017

दिवाली

हर वर्ष
क्यों हो रहा
रावण दहन
राम आगमन


एक बार ही
क्यों न हो
असुर तमाम
बसें राम


क्यों न हो
एक बार दशहरा
क्यों न हो
हर रोज़ दिवाली

Friday, October 13, 2017

नाम

मोहम्मद न राम होता
हिन्दू न मुसलमान होता
गर न तेरा नाम होता
तो तू इंसान होता

Sunday, October 1, 2017

महाकबर

मल नालों से
सटे सँकरे
टिन के डिब्बों
में रहती
महानगर की
महाकबर की
लाशें

ट्रफिक में
एम्बुलेंस सी
अटकी हैं
इनकी सांसे
दम लेंगी
दम टूटने पर
गिर कर
ट्रेन से
डूब कर
मैनहोल में
लाशें

बस-ट्रेन में
ईसा सी
लटकी हुई
दौड़ती जा रही
भगदड़ में जीती
भगदड़ में मरती
लाशें


Saturday, September 23, 2017

दूसरा

नहीं कर सकता
प्यार खुद से मैं
कर घृणा उससे

उत्थान नहीं मेरा
उसके पतन से

वह "दूसरा"
साया है मेरा ही

Tuesday, August 29, 2017

क्षितिज


क्षितिज के इस पार
आरंभ
आकार
स्थान
समय
शोर
ऊर्जा
अंत


क्षितिज के उस पार
अंत
निराकार
शून्य
शाश्वत
मौन
शीत
नवारंभ

Friday, August 18, 2017

शब्द

हे ईश्वर
मानव से तू
शब्द छीन ले

न शब्द हों
न अलग भाषाएँ
न अलग पहचानें
न अलग मानव

शब्द छीन ले
मानव से तू
हे ईश्वर

खुदा

खुदी को खुद से कर जुदा
खुदा खुद ही से है जुड़ा

दस्तक

दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का