एक पल जिया तो जाना जिंदगी का जवाब नहीं
Wednesday, July 13, 2016
Saturday, July 9, 2016
मेमने
रेल की बोरियों में
लदे, दबे
चले जा रहे हैं
मेमने
लदे, दबे
चले जा रहे हैं
मेमने
काटते हैं वक्त
काट न दे इन्हें
वक्त जब तक
चीखती हैं
इनकी चुप्पियाँ
सुनिये!
(5-Jul-2016)
काट न दे इन्हें
वक्त जब तक
चीखती हैं
इनकी चुप्पियाँ
सुनिये!
(5-Jul-2016)
Friday, July 1, 2016
मानव महान
रात सपने में
ईश्वर प्रकट हुए
दिव्य साक्षात
उठा मैं स्वागत हेतु
परन्तु रोक लिया
उन्होंने दौड़ कर
कहा कष्ट न कर
ऐ मानव
तू है तो मैं हूँ
ठौर है मेरी
मंदिर में
तेरे बनाए
खाता पहनता हूँ
तेरे चढ़ावे को
तू करता है
इतना कुछ मेरे लिए
न तेरे अपनों के लिए
जो सोते हैं भूखे बेछत
क्योंकि तू महान है
मुझ सा भगवान नहीं
ईश्वर प्रकट हुए
दिव्य साक्षात
उठा मैं स्वागत हेतु
परन्तु रोक लिया
उन्होंने दौड़ कर
कहा कष्ट न कर
ऐ मानव
तू है तो मैं हूँ
ठौर है मेरी
मंदिर में
तेरे बनाए
खाता पहनता हूँ
तेरे चढ़ावे को
तू करता है
इतना कुछ मेरे लिए
न तेरे अपनों के लिए
जो सोते हैं भूखे बेछत
क्योंकि तू महान है
मुझ सा भगवान नहीं
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दस्तक
दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का
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दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का
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जो लिखा सो सही सच वो पूरा पर नहीं दे रहा इस पल जो दस्तक उसकी तो पुस्तक नहीं तू ठहर हो शांत साक्षी तुझ सिवा तो कुछ नहीं
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इस साल कुछ पाना नहीं है खोज लेना है बस गुमशुदा खुद को। इस साल कहीं जाना नहीं है लौट आना है बस यहाँ, अभी। इस साल कुछ बनना नहीं है ...