क्यों चली गज फौज अदनी चींटी को एक मारने
सच है होता सच प्रबल दिग्गज लगे सब हारने
Friday, January 30, 2015
Wednesday, January 28, 2015
Saturday, January 24, 2015
Monday, December 15, 2014
Sunday, December 14, 2014
Friday, December 12, 2014
धर्म गरीब का
#१
वखत मिले दो रोटी, फ़कत एक हो चादर
नहीं फर्क फिर पंडित, क़ाज़ी या हो फादर
#२
कुरान पढ़ूँ मैं जपूँ पुराण
भजन भजूँ दूँ रोज़ अजान
गर ढके बदन हो जठर शांत
रब धर्म वही जो दे सम्मान
वखत मिले दो रोटी, फ़कत एक हो चादर
नहीं फर्क फिर पंडित, क़ाज़ी या हो फादर
#२
कुरान पढ़ूँ मैं जपूँ पुराण
भजन भजूँ दूँ रोज़ अजान
गर ढके बदन हो जठर शांत
रब धर्म वही जो दे सम्मान
Saturday, November 22, 2014
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दस्तक
दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का
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बनने से संभव नहीं है होना होना तो संभव है होने से ही होने की राह नहीं चाह नहीं होने का यत्न नहीं प्रयत्न नहीं होना तो हो रहना...
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कुश, कुश पर पिंड पिंड पर तिल, पुष्प, जल, भोग अर्पित कर सविधि श्राद्ध किया "मैं" का मैंने हे प्रभु "मैं" की मुक्ति हो ...
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इस साल कुछ पाना नहीं है खोज लेना है बस गुमशुदा खुद को। इस साल कहीं जाना नहीं है लौट आना है बस यहाँ, अभी। इस साल कुछ बनना नहीं है ...