Friday, January 30, 2015

सच

क्यों चली गज फौज अदनी चींटी को एक मारने
सच है होता सच प्रबल दिग्गज लगे सब हारने

Wednesday, January 28, 2015

शीशा

चेहरा
तराशा सँवारा
जतन से

चेहरा
विश्वसनीय
कहता जग

चेहरा
कतराता
शीशे से अब

Saturday, January 24, 2015

नेता

हैं बहुत बदले हर इक तारीफ़ से तारीख पर
है तेरी तारीफ़ तू तारीख को बदले अगर

Monday, December 15, 2014

आदमी

गिर रहा था आदमी
ना रुका वह ना थमा
गिर चुका था आदमी

Sunday, December 14, 2014

हिचकियाँ

कहती थी तू ही
याद करता है कोई
तो आती हैं हिचकियाँ
क्या सताती हैं
तुझको भी हिचकियाँ
माँ

Friday, December 12, 2014

धर्म गरीब का

#१
वखत मिले दो रोटी, फ़कत एक हो चादर
नहीं फर्क फिर पंडित, क़ाज़ी या हो फादर

#२
कुरान पढ़ूँ मैं जपूँ पुराण
भजन भजूँ दूँ रोज़ अजान
गर ढके बदन हो जठर शांत
रब धर्म वही जो दे सम्मान

Saturday, November 22, 2014

जबाँ

जड़ हैं जो बाटें जबाँ को जबाँ से
जबाँ ही तो बांधे जहाँ को जहाँ से

दस्तक

दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का