तुमने सुना होगा
एक तितली के
पंख फडफडाने भर से
तूफान आता है
एक तितली के
पंख फडफडाने भर से
तूफान आता है
मैंने देखा है
उस तितली
और उस तूफान को
अपने भीतर
दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का