सृष्टि
शांत है इतनी
मानो दम लेगी
कह कर ही
सब कुछ
Tuesday, May 2, 2017
Wednesday, April 19, 2017
Sunday, October 16, 2016
देशभक्त खटमल
पुराने खटमल
खून चूसते थे
और मौन था
उनका मुखिया
बदल दिया
नये खटमल
अच्छे हैं
खून चूसते हैं
पर अपने हैं
संस्कारी हैं
इनका मुखिया
बहुत भाता है
गाता है
जोशीले गाने
नहीं होने देता
एहसास टीस का
धन्य हो रहा हूँ
खून दे कर
देश के लिए
न सही
देशभक्त खटमलों
के लिए ही
खून चूसते थे
और मौन था
उनका मुखिया
बदल दिया
नये खटमल
अच्छे हैं
खून चूसते हैं
पर अपने हैं
संस्कारी हैं
इनका मुखिया
बहुत भाता है
गाता है
जोशीले गाने
नहीं होने देता
एहसास टीस का
धन्य हो रहा हूँ
खून दे कर
देश के लिए
न सही
देशभक्त खटमलों
के लिए ही
मैं क्षण एक
न था मैं पहले
न रहूँगा परे
इस क्षण से
न रहूँगा परे
इस क्षण से
मैं हूँ
केवल अभी
इसी क्षण
केवल अभी
इसी क्षण
जीता जीतता
मैं इसे
यह मुझे
मैं इसे
यह मुझे
नहीं पृथक मैं
न है यह
पृथक मुझसे
न है यह
पृथक मुझसे
मैं
क्षण
एक
क्षण
एक
Monday, September 26, 2016
कायर
कहता रहा मुझको कायर हमेशा
तू चलने लगा अब मेरे रास्तों पर
कहते है छप्पन का सीना तेरा है
छोटा कहाँ था मेरा दिल भी तुझसे
(एक पूर्व प्रधान मंत्री की ओर से, उनके जन्म दिवस पर )
तू चलने लगा अब मेरे रास्तों पर
कहते है छप्पन का सीना तेरा है
छोटा कहाँ था मेरा दिल भी तुझसे
(एक पूर्व प्रधान मंत्री की ओर से, उनके जन्म दिवस पर )
Subscribe to:
Posts (Atom)
दस्तक
दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का
-
दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का
-
जो लिखा सो सही सच वो पूरा पर नहीं दे रहा इस पल जो दस्तक उसकी तो पुस्तक नहीं तू ठहर हो शांत साक्षी तुझ सिवा तो कुछ नहीं
-
इस साल कुछ पाना नहीं है खोज लेना है बस गुमशुदा खुद को। इस साल कहीं जाना नहीं है लौट आना है बस यहाँ, अभी। इस साल कुछ बनना नहीं है ...