Thursday, September 25, 2014

जिगरे की पुकार

हानि से या लाभ से
तटस्थ जीत हार से
धर कदम दहाड़ कर
जिगरे की पुकार पर

ध्यान मात्र लक्ष्य जो
तो राह स्व प्रशस्त हो
भर प्रबल छलाँग वो
सो आसमाँ निरस्त्र हो

Friday, September 5, 2014

कविता लगी थी

नींद बैठी धरने पर
तजा धैर्य करवटों ने
रूह लगी गुड़गुड़ाने
जोर से कविता लगी थी

:)

Monday, August 18, 2014

संतुष्टि

लालसा न नीयत
न विरासत वसीयत
हैं संतुष्ट फिर भी
पशु पंछी पौधे
और हम?

Friday, August 15, 2014

भारत (2)

कड़ी बड़ी यह डगर मगर
उत्स्फूर्त उदित विश्वास है
सद्भाव सृजन सौहार्द शील
भारत जगत हित आस है

Tuesday, August 12, 2014

भारत

रंग सात
गहरे भी
हल्के भी
अपूर्ण
अशांत

रंग श्वेत
न गहरा
न हल्का
पूर्ण
शांत

रंग श्वेत
जैसे भारत
घोले समेटे
रंग सात

जीवन मूल्य

जीते हैं विरले ही मूल्यों पर मर कर
वरना तो जीते है बहुतेरे मर मर कर

Monday, August 11, 2014

पूजा

खुश हो कैसे भगवान
धूप दीप जयगान
या निर्बल उत्थान

दस्तक

दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का