बापू तेरी लाठी दे दे
चलूँ कूच ले उसे अथक
करूँ विफल जो शक्ति धूर्त
रक्त रक्त से करे पृथक
बापू तेरी लाठी दे दे
मानवता का हो सम्बल
दीन हीन ना रहे महीन
मूक मुखर हो अबल प्रबल
दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का
No comments:
Post a Comment