एक दिन
आदमी और भगवान
एक दूसरे से टकरा गए
आदमी ने हाथ बढ़ाया
कहा मैं आदमी हूँ
भगवान ने हाथ जोड़े
कहा मैं भगवान हूँ
आदमी क्रोधित हुआ
कहा "अलग" भगवान हो
तुम वो नहीं
जिसे मैंने बनाया
तुम्हारी शक्ल
उस "अलग" आदमी सी है
जिसे मैंने अभी मारा है
तुम्हें बचाने के लिए
भगवान ने कहा
तुम अलग आदमी हो
तुम वो नहीं
जिसे मैंने बनाया
Saturday, February 29, 2020
Saturday, February 15, 2020
माँ
माँ
कहीं जाती नहीं
वो बैठ जाती है
हृदय के एक कोने में
हम और प्यार करने लगते हैं
खुद से, खुदा से और खुदाई से
कहीं जाती नहीं
वो बैठ जाती है
हृदय के एक कोने में
हम और प्यार करने लगते हैं
खुद से, खुदा से और खुदाई से
Monday, December 16, 2019
सच का साहस
तू तपा अपने सच के आक्रोश को
इसकी चिनगारी से सूरज बना दे
काँप जाए झूठ का झूठा रुतबा
साहस से अपनी ऊंगली उठा दे
भेड़ों का राजा
कुछ भेड़ें गैर हैं
उनसे भेड़ों का बैर है
भेड़ों ने कपट जाल बुना है
भेड़िये को अपना राजा चुना है
राजा गैर भेड़ें खाता है
इस लिए भेड़ों को भाता है
उनसे भेड़ों का बैर है
भेड़ों ने कपट जाल बुना है
भेड़िये को अपना राजा चुना है
राजा गैर भेड़ें खाता है
इस लिए भेड़ों को भाता है
Saturday, November 9, 2019
राम लला
#१
क्या हुआ कि यहाँ
खून बहा था
आदमी मरा था
दाग पोंछ दिये
गंगा जल से हमने
राम लला
तुम लौट आओ
निसंकोच
#२
क्या हुआ कि यहाँ
आस्था गिरी थी
मर्यादा मरी थी
तुमसे दूर भेज दिया
खुदा को हमने
राम लला
तुम रहो यहाँ
बेखौफ़
Wednesday, October 2, 2019
Thursday, August 15, 2019
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दस्तक
दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का
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बनने से संभव नहीं है होना होना तो संभव है होने से ही होने की राह नहीं चाह नहीं होने का यत्न नहीं प्रयत्न नहीं होना तो हो रहना...
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कुश, कुश पर पिंड पिंड पर तिल, पुष्प, जल, भोग अर्पित कर सविधि श्राद्ध किया "मैं" का मैंने हे प्रभु "मैं" की मुक्ति हो ...
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इस साल कुछ पाना नहीं है खोज लेना है बस गुमशुदा खुद को। इस साल कहीं जाना नहीं है लौट आना है बस यहाँ, अभी। इस साल कुछ बनना नहीं है ...
