रहा मूढ़ तैरता अपने ज्ञान की सतह पर
बुद्ध हुआ डूब अपने अज्ञान की थाह में
Monday, April 30, 2018
Monday, February 26, 2018
Tuesday, December 12, 2017
शहर में
एक बूँद गिरी
पत्ता राख हो गया
शहर में
कहते हैं
आखिरी आँसू था
आखिरी गौरैया का
अब गौरैया नहीं होगी
न ही आँसू गिरेगा
शहर में
पत्ता राख हो गया
शहर में
कहते हैं
आखिरी आँसू था
आखिरी गौरैया का
अब गौरैया नहीं होगी
न ही आँसू गिरेगा
शहर में
Saturday, November 25, 2017
ऑर्डर ऑर्डर
मृत्यु
एक न्यायमूर्ति की
व्यवस्था कहती है
हृदय गतिहीन हुआ था
परंतु व्यवस्था
जीवित थी
गतिमान थी
बुलेट ट्रेन सी
आटो रिक्शा में अस्पताल
अस्पताल से अस्पताल
पोस्ट-मार्टम
शव के शहर से दूर
शव के पिता के गांव
शव को पहुँचाया
फिर दम लिया
व्यवस्था ने
व्यवस्था
तत्पर थी
तत्परता से भूल गई
परिवार को बताना
कहते हैं
न्यायमूर्ति दोषी थे
सौ करोड़
ठुकराए थे
सजा मिली शायद
न्याय हुआ शायद
न्याय
जीवित रहा
गतिमान रहा
बुलेट ट्रेन सा
तीन सप्ताह
आरोपी बरी
केस समाप्त
ऑर्डर ऑर्डर
और डर
और डर
अब हिम्मत नहीं होगी
कोई आरोप करे
आरोपी पर
आरोपी
देश भक्त है
राम भक्त है
देश में
राम राज्य लाएगा
देश सारा
अयोध्या बनेगा
सभी खुश होंगे
रावण मरेगा
और कोई नहीं मरेगा
कोई मारा नहीं जायेगा
व्यवस्था
जीवित होगी
तत्पर होगी
न्याय
जीवित होगा
तत्पर होगा
जय श्री राम
एक न्यायमूर्ति की
व्यवस्था कहती है
हृदय गतिहीन हुआ था
परंतु व्यवस्था
जीवित थी
गतिमान थी
बुलेट ट्रेन सी
आटो रिक्शा में अस्पताल
अस्पताल से अस्पताल
पोस्ट-मार्टम
शव के शहर से दूर
शव के पिता के गांव
शव को पहुँचाया
फिर दम लिया
व्यवस्था ने
व्यवस्था
तत्पर थी
तत्परता से भूल गई
परिवार को बताना
कहते हैं
न्यायमूर्ति दोषी थे
सौ करोड़
ठुकराए थे
सजा मिली शायद
न्याय हुआ शायद
न्याय
जीवित रहा
गतिमान रहा
बुलेट ट्रेन सा
तीन सप्ताह
आरोपी बरी
केस समाप्त
ऑर्डर ऑर्डर
और डर
और डर
अब हिम्मत नहीं होगी
कोई आरोप करे
आरोपी पर
आरोपी
देश भक्त है
राम भक्त है
देश में
राम राज्य लाएगा
देश सारा
अयोध्या बनेगा
सभी खुश होंगे
रावण मरेगा
और कोई नहीं मरेगा
कोई मारा नहीं जायेगा
व्यवस्था
जीवित होगी
तत्पर होगी
न्याय
जीवित होगा
तत्पर होगा
जय श्री राम
Sunday, November 12, 2017
Thursday, October 19, 2017
दिवाली
हर वर्ष
क्यों हो रहा
रावण दहन
राम आगमन
एक बार ही
क्यों न हो
असुर तमाम
बसें राम
क्यों न हो
एक बार दशहरा
क्यों न हो
हर रोज़ दिवाली
क्यों हो रहा
रावण दहन
राम आगमन
एक बार ही
क्यों न हो
असुर तमाम
बसें राम
क्यों न हो
एक बार दशहरा
क्यों न हो
हर रोज़ दिवाली
Subscribe to:
Posts (Atom)
दस्तक
दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का
-
बनने से संभव नहीं है होना होना तो संभव है होने से ही होने की राह नहीं चाह नहीं होने का यत्न नहीं प्रयत्न नहीं होना तो हो रहना...
-
कुश, कुश पर पिंड पिंड पर तिल, पुष्प, जल, भोग अर्पित कर सविधि श्राद्ध किया "मैं" का मैंने हे प्रभु "मैं" की मुक्ति हो ...
-
इस साल कुछ पाना नहीं है खोज लेना है बस गुमशुदा खुद को। इस साल कहीं जाना नहीं है लौट आना है बस यहाँ, अभी। इस साल कुछ बनना नहीं है ...