Sunday, June 10, 2018

पर्दे


डर
लोभ
उम्मीद
पश्चाताप


कितने पर्दे हैं
मेरे और मेरे बीच

उदासी


मेरे और इस क्षण के
बीच बैठती है
उदासी


जितनी दूरी
उतनी उदासी

उम्मीद


नाराज नहीं किया
जिंदगी ने कभी
कुछ इल्जाम मुझ पर
कुछ मेरी उम्मीद पर

Wednesday, June 6, 2018

साजिश


साजिश है जमाने की, मेरे दोस्त की खता नहीं
कितना मासूम है वो, उसे दोस्ती भी पता नहीं

Tuesday, June 5, 2018

कुर्बानी

तेरी कुर्बानी का रहेगा एहसान, ऐ दोस्त
मैंने खोई कुछ ही दौलत, पर तूने यारी

Sunday, June 3, 2018

सार

शब्द से कहो शांत रहें
शोर में सार खो जाता है

मन से कहो मौन रहे
सोच से सच ढक जाता है

ऐतबार

तू कर दगा
मैं ऐतबार करूँ
एक तेरा शौक
एक आदत मेरी

दस्तक

दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का