बिलख रहे वसुदेव देवकी
भ्रष्ट कंस संहार करो
गोरखपुर के कान्हाओं का
हे गोरख उद्धार करो
Monday, August 14, 2017
Tuesday, August 8, 2017
मैं
तुम मुझे जानते हो
शायद मेरे नाम से
पर मैं मेरा नाम नहीं
हो सकता था
कुछ और भी यह नाम
पर मैं मैं ही रहता
कुछ और नहीं
तुम मुझे जानते हो
शायद मेरे चेहरे से
या आकार, आवाज़ से
पर मैं मेरा चेहरा नहीं
मैं यह आकार, आवाज़ नहीं
हो सकते थे
कुछ और भी यह सब
पर मैं मैं ही रहता
कुछ और नहीं
तुम मुझे जानते हो
शायद मेरे विचार से
या मूल्यों, भावों से
पर मैं मेरे विचार नहीं
मैं यह मूल्य, भाव नहीं
हो सकते थे
कुछ और भी यह सब
पर मैं मैं ही रहता
कुछ और नहीं
तुम पूछ रहे हो
फिर मैं क्या हूँ
कौन हूँ
जान लोगे तुम
जब जान लोगे
तुम क्या हो
कौन हो
तुम भी नहीं
तुम्हारा नाम
या वह तमाम
जिससे जानता हूँ
मैं तुम्हें
मैं हूँ
तुम वही हो
एक हूँ
एक हो
निर्गुण
निराकार
निराभाव
निर्विचार
निरंतर
एक
शायद मेरे नाम से
पर मैं मेरा नाम नहीं
हो सकता था
कुछ और भी यह नाम
पर मैं मैं ही रहता
कुछ और नहीं
तुम मुझे जानते हो
शायद मेरे चेहरे से
या आकार, आवाज़ से
पर मैं मेरा चेहरा नहीं
मैं यह आकार, आवाज़ नहीं
हो सकते थे
कुछ और भी यह सब
पर मैं मैं ही रहता
कुछ और नहीं
तुम मुझे जानते हो
शायद मेरे विचार से
या मूल्यों, भावों से
पर मैं मेरे विचार नहीं
मैं यह मूल्य, भाव नहीं
हो सकते थे
कुछ और भी यह सब
पर मैं मैं ही रहता
कुछ और नहीं
तुम पूछ रहे हो
फिर मैं क्या हूँ
कौन हूँ
जान लोगे तुम
जब जान लोगे
तुम क्या हो
कौन हो
तुम भी नहीं
तुम्हारा नाम
या वह तमाम
जिससे जानता हूँ
मैं तुम्हें
मैं हूँ
तुम वही हो
एक हूँ
एक हो
निर्गुण
निराकार
निराभाव
निर्विचार
निरंतर
एक
Sunday, June 25, 2017
देशभक्त
ऐसे जम कर हो रहा "जालिम" का प्रतिकार
"देशभक्त" फूँक रहे हैं देखो अपना ही घरबार
"देशभक्त" फूँक रहे हैं देखो अपना ही घरबार
ऐसे सर चढ़ बोल रहा स्व-शुद्धि का भूत
मल रहे हैं देह पर स्व-अस्थियों की भभूत
मल रहे हैं देह पर स्व-अस्थियों की भभूत
Tuesday, May 2, 2017
Wednesday, April 19, 2017
Sunday, October 16, 2016
देशभक्त खटमल
पुराने खटमल
खून चूसते थे
और मौन था
उनका मुखिया
बदल दिया
नये खटमल
अच्छे हैं
खून चूसते हैं
पर अपने हैं
संस्कारी हैं
इनका मुखिया
बहुत भाता है
गाता है
जोशीले गाने
नहीं होने देता
एहसास टीस का
धन्य हो रहा हूँ
खून दे कर
देश के लिए
न सही
देशभक्त खटमलों
के लिए ही
खून चूसते थे
और मौन था
उनका मुखिया
बदल दिया
नये खटमल
अच्छे हैं
खून चूसते हैं
पर अपने हैं
संस्कारी हैं
इनका मुखिया
बहुत भाता है
गाता है
जोशीले गाने
नहीं होने देता
एहसास टीस का
धन्य हो रहा हूँ
खून दे कर
देश के लिए
न सही
देशभक्त खटमलों
के लिए ही
मैं क्षण एक
न था मैं पहले
न रहूँगा परे
इस क्षण से
न रहूँगा परे
इस क्षण से
मैं हूँ
केवल अभी
इसी क्षण
केवल अभी
इसी क्षण
जीता जीतता
मैं इसे
यह मुझे
मैं इसे
यह मुझे
नहीं पृथक मैं
न है यह
पृथक मुझसे
न है यह
पृथक मुझसे
मैं
क्षण
एक
क्षण
एक
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दस्तक
दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का
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बनने से संभव नहीं है होना होना तो संभव है होने से ही होने की राह नहीं चाह नहीं होने का यत्न नहीं प्रयत्न नहीं होना तो हो रहना...
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कुश, कुश पर पिंड पिंड पर तिल, पुष्प, जल, भोग अर्पित कर सविधि श्राद्ध किया "मैं" का मैंने हे प्रभु "मैं" की मुक्ति हो ...
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इस साल कुछ पाना नहीं है खोज लेना है बस गुमशुदा खुद को। इस साल कहीं जाना नहीं है लौट आना है बस यहाँ, अभी। इस साल कुछ बनना नहीं है ...
