Monday, August 14, 2017

गोरखपुर के कान्हा

बिलख रहे वसुदेव देवकी
भ्रष्ट कंस संहार करो
गोरखपुर के कान्हाओं का
हे गोरख उद्धार करो 

Tuesday, August 8, 2017

मैं

तुम मुझे जानते हो
शायद मेरे नाम से
पर मैं मेरा नाम नहीं
हो सकता था
कुछ और भी यह नाम
पर मैं मैं ही रहता
कुछ और नहीं


तुम मुझे जानते हो
शायद मेरे चेहरे से
या आकार, आवाज़ से
पर मैं मेरा चेहरा नहीं
मैं यह आकार, आवाज़ नहीं
हो सकते थे
कुछ और भी यह सब
पर मैं मैं ही रहता
कुछ और नहीं


तुम मुझे जानते हो
शायद मेरे विचार से
या मूल्यों, भावों से
पर मैं मेरे विचार नहीं
मैं यह मूल्य, भाव नहीं
हो सकते थे
कुछ और भी यह सब
पर मैं मैं ही रहता
कुछ और नहीं


तुम पूछ रहे हो
फिर मैं क्या हूँ
कौन हूँ
जान लोगे तुम
जब जान लोगे
तुम क्या हो
कौन हो
तुम भी नहीं
तुम्हारा नाम
या वह तमाम
जिससे जानता हूँ
मैं तुम्हें


मैं हूँ
तुम वही हो
एक हूँ
एक हो
निर्गुण
निराकार
निराभाव
निर्विचार
निरंतर
एक

Sunday, June 25, 2017

देशभक्त

ऐसे जम कर हो रहा "जालिम" का प्रतिकार
"देशभक्त" फूँक रहे हैं देखो अपना ही घरबार

ऐसे सर चढ़ बोल रहा स्व-शुद्धि का भूत
मल रहे हैं देह पर स्व-अस्थियों की भभूत

Tuesday, May 2, 2017

शांति

सृष्टि
शांत है इतनी
मानो दम लेगी
कह कर ही
सब कुछ

Wednesday, April 19, 2017

आग

सोचा था बुझेगी आग,थमेगा द्वेष
राख भी जल रही अब, बढ़ रहा देश

Sunday, October 16, 2016

देशभक्त खटमल

पुराने खटमल
खून चूसते थे
और मौन था
उनका मुखिया
बदल दिया

नये खटमल
अच्छे हैं
खून चूसते हैं
पर अपने हैं
संस्कारी हैं

इनका मुखिया
बहुत भाता है
गाता है
जोशीले गाने
नहीं होने देता
एहसास टीस का

धन्य हो रहा हूँ
खून दे कर
देश के लिए
न सही
देशभक्त खटमलों
के लिए ही

मैं क्षण एक

न था मैं पहले
न रहूँगा परे
इस क्षण से

मैं हूँ
केवल अभी
इसी क्षण

जीता जीतता
मैं इसे
यह मुझे

नहीं पृथक मैं
न है यह
पृथक मुझसे

मैं
क्षण
एक

दस्तक

दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का