Sunday, June 25, 2017

देशभक्त

ऐसे जम कर हो रहा "जालिम" का प्रतिकार
"देशभक्त" फूँक रहे हैं देखो अपना ही घरबार

ऐसे सर चढ़ बोल रहा स्व-शुद्धि का भूत
मल रहे हैं देह पर स्व-अस्थियों की भभूत

Tuesday, May 2, 2017

शांति

सृष्टि
शांत है इतनी
मानो दम लेगी
कह कर ही
सब कुछ

Wednesday, April 19, 2017

आग

सोचा था बुझेगी आग,थमेगा द्वेष
राख भी जल रही अब, बढ़ रहा देश

Sunday, October 16, 2016

देशभक्त खटमल

पुराने खटमल
खून चूसते थे
और मौन था
उनका मुखिया
बदल दिया

नये खटमल
अच्छे हैं
खून चूसते हैं
पर अपने हैं
संस्कारी हैं

इनका मुखिया
बहुत भाता है
गाता है
जोशीले गाने
नहीं होने देता
एहसास टीस का

धन्य हो रहा हूँ
खून दे कर
देश के लिए
न सही
देशभक्त खटमलों
के लिए ही

मैं क्षण एक

न था मैं पहले
न रहूँगा परे
इस क्षण से

मैं हूँ
केवल अभी
इसी क्षण

जीता जीतता
मैं इसे
यह मुझे

नहीं पृथक मैं
न है यह
पृथक मुझसे

मैं
क्षण
एक

Monday, September 26, 2016

कायर

कहता रहा मुझको कायर हमेशा
तू चलने लगा अब मेरे रास्तों पर
कहते है छप्पन का सीना तेरा है
छोटा कहाँ था मेरा दिल भी तुझसे

(एक पूर्व प्रधान मंत्री की ओर से, उनके जन्म दिवस पर )

Wednesday, September 14, 2016

सही

खुश हैं सब उसके मरने की अफवाह पर
कुछ तो सही ही कर रहा होगा वो

दस्तक

दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का