सागर
बादल
बर्फ
ओस
झरना
नदी
फिर सागर
अनवरत
अथक
प्रवास
बूंद का
या
पानी का
बूंद छल
पानी सत्य
या
पानी छल
बूंद सत्य
मैं कौन
पानी
या
बूंद
Tuesday, November 27, 2018
Subscribe to:
Comments (Atom)
दस्तक
दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का
-
बनने से संभव नहीं है होना होना तो संभव है होने से ही होने की राह नहीं चाह नहीं होने का यत्न नहीं प्रयत्न नहीं होना तो हो रहना...
-
कुश, कुश पर पिंड पिंड पर तिल, पुष्प, जल, भोग अर्पित कर सविधि श्राद्ध किया "मैं" का मैंने हे प्रभु "मैं" की मुक्ति हो ...
-
फरेब बहाने झूठ मिट रहे हैं धीरे-धीरे आकृतियाँ कहानियाँ शब्द घुल रहे हैं धीरे-धीरे अहम् वहम् फहम से कुछ दूर मिल रहे हैं हम धीरे...