Tuesday, October 30, 2018

क्षण

समय
चले जितना

पार नहीं
हो सकता
इस क्षण के

Friday, September 28, 2018

भेड़ों का विश्वास

बिल्लियाँ बोलीं
गरीबी हटाओ
भेड़ों ने
विश्वास किया
और हट गई
सचमुच गरीबी
बिल्लियों की

भेड़िये बोले
अच्छे दिन आएंगे
भेड़ों ने
विश्वास किया
और आए
सचमुच अच्छे दिन
भेड़ियों के

भेड़ो को
विश्वास है
अपने विश्वास पर
कर रहे हैं
रक्षा डट कर
कुछ बिल्लियों के
महल की
कुछ भेड़ियों के
प्रासाद की

Sunday, September 23, 2018

तिरंगे का अपमान

कुली
ढोता बोझ
दो बार
सुबह स्टेशन
शाम परिवार

बोझ तले
बोध कहाँ
गरीब का
तिरंगे से
छांव चुराना
तिरंगे का
अपमान है
अपराध है

बोझ तले
बोध कहाँ
इकहत्तर
वर्षों में
गरीब के लिए
कानून है
न्याय नहीं

Saturday, September 1, 2018

उम्र कैद

क्या होगा याद
आखिरी सांस पर

वह पल
जिनके पंख लगा
मैं उड़ा
स्वच्छंद

या
उम्र सारी
जो गुजार दी
आकांक्षा की
कैद में

Friday, August 31, 2018

गद्दार

दीमक सेना बन बैठी
है देश की चौकीदार
नव भारत हो रहा उदित
अब हर दीपक गद्दार

Thursday, August 30, 2018

धुआँ

धुआँ
उठ रहा है
शहर में
बाईं ओर

आदमी
जल रहा है
शहर में
दाईं ओर

Thursday, August 23, 2018

दूसरा

घृणा या प्रेम
होते हैं दोनों
स्वयं ही से

या मैं दूसरा
या दूसरे मैं

दस्तक

दस्तक देता रहता है कि सुन सके अपनी ही दस्तक "मैं" मैं को शक है अपने होने पर मैं को भय है अपने न होने का